
चिम्ब्री एक जर्मेनिक जनजाति है जो 1300 के आसपास बवेरिया से वेरोना, वेनिटो आई। ज्यादातर ये चरवाहे और किसान थे, लकड़हारे और सामान्य भेड़ पालक। उस समय वेरोना के हालात स्कालिज़र्स द्वारा नियंत्रित थे, जो भेड़ की ब्रोग्ने के बड़े मालिक थे जो उच्च गुणवत्ता वाली ऊन का उत्पादन करते थे। उन्होंने कांग्रांडे डेला स्काला से मदद मांगी और उन्हें कम से कम प्राचीन तकनीक से का पर्वतीय क्षेत्र पर भू दायित्व का शासन संभालने का मौका दिया गया। आज भी उनकी द्वारा बनाई गई पत्थर की चैकी को बवेरियाई पद्धति में कोरियाई छेदन तकनीक से बनाया गया है। उनके साथ ही पनीर का उत्पादन भी शुरू हुआ जो आज तक मोन्टे वेरोनेज़ डीओपी की तैयारी की परंपरा में बनी हुई है। यह एक बहुत ही आकर्षक और अद्वितीय पनीर है।
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चिम्ब्री एक जर्मेनिक जनजाति है जो 1300 के आसपास बवेरिया से वेरोना, वेनिटो आई। ज्यादातर ये चरवाहे और किसान थे, लकड़हारे और सामान्य भेड़ पालक। उस समय वेरोना के हालात स्कालिज़र्स द्वारा नियंत्रित थे, जो भेड़ की ब्रोग्ने के बड़े मालिक थे जो उच्च गुणवत्ता वाली ऊन का उत्पादन करते थे। उन्होंने कांग्रांडे डेला स्काला से मदद मांगी और उन्हें कम से कम प्राचीन तकनीक से का पर्वतीय क्षेत्र पर भू दायित्व का शासन संभालने का मौका दिया गया। आज भी उनकी द्वारा बनाई गई पत्थर की चैकी को बवेरियाई पद्धति में कोरियाई छेदन तकनीक से बनाया गया है। उनके साथ ही पनीर का उत्पादन भी शुरू हुआ जो आज तक मोन्टे वेरोनेज़ डीओपी की तैयारी की परंपरा में बनी हुई है। यह एक बहुत ही आकर्षक और अद्वितीय पनीर है।